Ashtavakra Mahagita
Ashtavakra Mahagita
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अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤µà¤•à¥à¤° ऋषि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ विरचित "अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤µà¤•à¥à¤° महागीता " अदà¥à¤µà¥ˆà¤¤ वेदानà¥à¤¤ का महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ है। अपने ही पिता के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शापित ऋषि का शरीर आठसà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ से टेड़ा-मेडा अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ वकà¥à¤° था, इसीलिठवह "अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤µà¤•à¥à¤°" नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤ । यह मिथिला नरेश राजा जनक के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® गà¥à¤°à¥ थे। अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤µà¤•à¥à¤° ऋषि ने अपने शिषà¥à¤¯ राजा जनक के तीन पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤‚ - (1) जà¥à¤žà¤¾à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है? (2) मà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤«à¤¼ किसे कहते हैं? और (3) वैरागà¥à¤¯ कà¥à¤¯à¤¾ है? के उतà¥à¤¤à¤° देते हà¥à¤, जिस उचà¥à¤šà¤¤à¤® जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की धारा पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ की, वही है- अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤µà¤•à¥à¤° महागीता। विषयों से अनाशकà¥à¤¤à¤¿ का मारà¥à¤— दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ ऋषि ने राजा जनक के माधà¥à¤¯à¤® से सà¤à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¨-पिपासà¥à¤“ं को परम मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ का मारà¥à¤— ही दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ है। संवादातà¥à¤®à¤•-शैली में लिखा हà¥à¤† यह गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है। इस गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ में जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ मानव- जीवन में उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ अनेक शंकाओं का समाधान सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ढूंढ सकेंगे। तथा दà¥à¤ƒà¤– à¤à¤µà¤‚ अशानà¥à¤¤à¤¿ के सागर में हिचकोलों से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ बचकर किंचितॠसà¥à¤– व शानà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकेंगे। इसी आशा के साथ मैंने इस गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ की यथामति यथाशकà¥à¤¤à¤¿ वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है। यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से जà¥à¤žà¤¾à¤¨-पिपासà¥à¤“ं को जà¥à¤žà¤¾à¤¨-रस में सराबोर करती हà¥à¤ˆ, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जीवन की नई ऊॅचाइयों तक पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¯à¥‡à¤—ी ।
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डॉ- बीना गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ सनॠ1974 से 2013 तक संसà¥à¤•ृत अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ का कारà¥à¤¯ बैकà¥à¤£à¥à¤ ी देवी कनà¥à¤¯à¤¾ महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ आगरा में किया । आपके निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ में चौबीस छातà¥à¤°à¤“ं ने शोध कारà¥à¤¯ (Ph-D) किया । अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨, अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ व लेखन में आपकी विशेष रà¥à¤šà¤¿ रही है। शोध-संगोषà¥à¤ ियों मै आपने लगà¤à¤— पचास शोध-पतà¥à¤° पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किये ! आपकी दरà¥à¤¶à¤¨ साहितà¥à¤¯ व अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® में विशेष रà¥à¤šà¤¿ रही है। वेदानà¥à¤¤à¤¸à¤¾à¤°, सांखà¥à¤¯à¤•ारिका, तरà¥à¤•à¤à¤¾à¤·à¤¾, चारà¥à¤µà¤¾à¤• दरà¥à¤¶à¤¨, जैन à¤à¤µà¤‚ बौदà¥à¤§ दरà¥à¤¶à¤¨ तथा सौनà¥à¤¦à¤°à¥à¤¯à¤²à¤¹à¤°à¥€ की टीकायें लिखी तथा आगरा विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ सà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पचà¥à¤šà¥€à¤¸ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों (वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण-अलंकार, साहितà¥à¤¯ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤) का समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ किया । शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤—वदॠगीता, अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤µà¤•à¥à¤° महागीता की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों को लिखने का शà¥à¤°à¥‡à¤¯ à¤à¥€ आपको है।
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