Samajshastra Parichay (Introducing Sociology): Class-XI (Paper-I) (Based on Syllabus of CBSE, State Board/Council of States including Navodaya and Kendriya Vidyalayas etc. following NCERT pattern)
Samajshastra Parichay (Introducing Sociology): Class-XI (Paper-I) (Based on Syllabus of CBSE, State Board/Council of States including Navodaya and Kendriya Vidyalayas etc. following NCERT pattern)
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पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• की रचना विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त +2 सà¥à¤¤à¤° के समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° के विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ताओं को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर à¤à¤• सà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पाठà¥à¤¯-पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• के रूप में की गयी है। मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से CBSE के पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤°à¥à¤®à¥‹à¤‚ तथा NCERT के निदेशों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• की रचना की गयी है। NCERT की पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों में जो कमियाठहैं उनकी à¤à¤°à¤ªà¤¾à¤ˆ करने की à¤à¤°à¤¸à¤• कोशिश की गयी है। राजà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° के पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ विषय-वसà¥à¤¤à¥à¤“ं का समावेश करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया गया है। इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में इस बात पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया गया है कि विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° के नवीनतम तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की जानकारी सरल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो। साथ ही इस बात की à¤à¥€ पूरी कोशिश की गयी है कि जो लोग अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ माधà¥à¤¯à¤® से पठन-पाठन करते हैं, वे à¤à¥€ इसे पढ़कर समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° के गूढ़ विषयों को आसानी से समठसकें। इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में इस बात का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया गया है कि अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ के समाजशासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का हिनà¥à¤¦à¥€ में सही और सटीक अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ हो तथा पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के नामों का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ हो। इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में लेखक ने अपने समाजविजà¥à¤žà¤¾à¤¨ विशà¥à¤µà¤•ोश (2009) को आधार मानकर à¤à¤• सà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• की रचना करने की कोशिश की है। आमतौर पर हिनà¥à¤¦à¥€ की पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों में न तो तकनीकि शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का शà¥à¤¦à¥à¤§ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ और न ही लेखकों के नामों का शà¥à¤¦à¥à¤§ उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ देखने को मिलता है। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• विशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ समाजशासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ सूचनाओं का रोचक à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° है। इसमें जटिल-से-जटिल तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को सहजता à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤—मता से पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है।
About the Author:Â
डॉ. जे. पी. सिंह, à¤à¤®.à¤. (पटना वि.) à¤à¤®.पिफल. (जे.à¤à¤¨.यू.) पी.à¤à¤š.डी. (ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¨ नेशनल यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€, केनबेरा ), पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° (सेवा-निवृतà¥à¤¤), सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤•ोतà¥à¤¤à¤° समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° विà¤à¤¾à¤—, पटना विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, पटना। निदेशक (उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾), बिहार सरकार तथा पà¥à¤°à¥‹-वाइसचांसलर, पटना विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के रूप में योगदान का अनà¥à¤à¤µà¥¤ लेखक à¤à¤• पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ समाजशासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ à¤à¤µà¤‚ जनसंखà¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के रूप में जाने जाते हैं। लेखक की अनà¥à¤¯ उपयोगी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•े 1. समाजविजà¥à¤žà¤¾à¤¨ विशà¥à¤µà¤•ोश 2. समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° के मूलततà¥à¤¤à¥à¤µ (तृतीय संसà¥à¤•रण) 3. आधà¥à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सामाजिक परिवरà¥à¤¤à¤¨ (दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•रण) 4. समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° अवधारणाà¤à¤ à¤à¤µà¤‚ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त (तृतीय संसà¥à¤•रण)
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