Srngaraprakasa: Sahityaprakasa by Bhojaraja: Vol.1
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शृङà¥à¤—ारपà¥à¤°à¤•ाश सचà¥à¤šà¥‡ अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में रसपà¥à¤°à¤•ाश है और इसका नाम है साहितà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤•ाश। संसà¥à¤•ृतकावà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° के इतिहास में साहितà¥à¤¯à¤•लà¥à¤ª नामक अनà¥à¤¤à¤¿à¤®à¤•लà¥à¤ª का आरमà¥à¤ इसी से हà¥à¤† है। धारानगरी में १००५-१०६२ ई. में रचित यह गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ १९१६ में मलयालम लिपि में कोचीन के पास मिला, किनà¥à¤¤à¥ इसे वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ रूप से समà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ होने का अवसर इस संसà¥à¤•रण के साथ मिल रहा है। यह गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ बीच-बीच में तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤¤ à¤à¥€ है, किनà¥à¤¤à¥ इस संसà¥à¤•रण में उसकी पूरà¥à¤¤à¤¿ यथासमà¥à¤à¤µ कर दी गयी है। अब यहाठअपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ २६वाठपà¥à¤°à¤•ाश à¤à¥€ परिशिषà¥à¤Ÿ में नये सिरे से बना कर जोड़ दिया गया है। इस गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ में पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत गाथाओं को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• आधार पर ठीक कर उनके पाठà¤à¥‡à¤¦ परिशिषà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ में दे दिठगये हैं। साहितà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° के ज़िस आगम को आननà¥à¤¦à¤µà¤°à¥à¤¦à¥à¤§à¤¨ व अà¤à¤¿à¤¨à¤µà¤—à¥à¤ªà¥à¤¤ ने जानते हà¥à¤ à¤à¥€ छोड़ रखा था, पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ अगà¥à¤¨à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤£ में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ उसी आगम की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ है। à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार से यह नाटà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° का à¤à¥€ पà¥à¤¨à¤ƒ संसà¥à¤•ार है। à¤à¤¾à¤·à¤¾ ही बनती है कावà¥à¤¯, अतः पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ में à¤à¤¾à¤·à¤¾ के आरमà¥à¤à¤¿à¤• घटक वरà¥à¤£ से लेकर अनà¥à¤¤à¤¿à¤® रूप पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ तक का वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ दिया गया है। इस पà¥à¤°à¤•ार यह गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤¾à¤•रणशासà¥à¤¤à¥à¤° का à¤à¥€ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ है। इसका निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ समसà¥à¤¤ आगà¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ से मà¥à¤•à¥à¤¤ है। आचारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤°à¤¤, à¤à¤°à¥à¤¤à¥ƒà¤¹à¤°à¤¿, दणà¥à¤¡à¥€, à¤à¤¾à¤®à¤¹ का यथोचित उपयोग किया गया है। कवियों में कालिदास, à¤à¤µà¤à¥‚ति, à¤à¤¾à¤°à¤µà¤¿ और माघ को वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दिया गया है इसमें। à¤à¥‹à¤œà¤°à¤¾à¤œ अà¤à¤¿à¤¨à¤µà¤—à¥à¤ªà¥à¤¤ के कनिषà¥à¤ समकालिक आचारà¥à¤¯ हैं, जो अपने समय तक की साहितà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ समगà¥à¤°à¤¤à¤¾ को धà¥à¤µà¤¨à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से अधिक पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करते हैं। यह संसà¥à¤•रण २०६८ पृषà¥à¤ ों का है जिसमें १६३० पृषà¥à¤ मूल के हैं.
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