Swatantrottar Bhartiya Darshanik Chintan
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à¤à¤¾à¤°à¤¤ की दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ अति पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ है। काल-कà¥à¤°à¤® में à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• और सामाजिक परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के कारण उनमें à¤à¥€ परिवरà¥à¤¤à¤¨ हà¥à¤ पर à¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• या निषेधातà¥à¤®à¤• रूप से उन पर वैदिक और उपनिषदिक विचारों का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ रहा। इसी परिवरà¥à¤¤à¤¨ के कà¥à¤°à¤® में उनà¥à¤¨à¥€à¤¸à¤µà¥€à¤‚ सदी में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• चिनà¥à¤¤à¤¨ में à¤à¤• कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति हà¥à¤ˆ-सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° चिनà¥à¤¤à¤¨ की। राममोहन राय, विदà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤—र, अरविनà¥à¤¦, विवेकाननà¥à¤¦, गांधी, राधाकृषà¥à¤£à¤¨, इकबाल आदि ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ चिनà¥à¤¤à¤¨ को à¤à¤• नई दिशा दी। रूढियों तथा अंनà¥à¤§à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सततॠचेषà¥à¤Ÿà¤¾ होती रही। फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प इस सदी के उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¦à¥à¤§ में, जब देश को सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ मिली तो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• चिनà¥à¤¤à¤¨ और पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ ने à¤à¤• नया रूप धारण कर लिया। विचार का केनà¥à¤¦à¥à¤° बिनà¥à¤¦à¥ पारलौकिक से हटकर इहलौकिक हो गया। कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿, à¤à¤®à¥¦à¤à¤¨à¥¦ राय, जवाहरलाल, जयपà¥à¤°à¤•ाश, देवी पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ चटà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯, आदि का इसमें मà¥à¤–à¥à¤¯ योगदान रहा है। अतः उनके विचारों की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ के बिना समकालीन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दरà¥à¤¶à¤¨ की कहानी अधूरी रह जायेगी। उनके विचारों का परिचय देना ही इस छोटी सी रचना का लकà¥à¤·à¥à¤¯ है। यह रचना सà¥à¤µà¤¤à¤¨à¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• चिनà¥à¤¤à¤¨ की कहानी है। इसके लिठसात विचारकों का चयन किया गया है। पà¥à¤°à¤¥à¤® हैं राममोहन राय। उनका विचारकाल तो उनà¥à¤¨à¤¸à¤µà¥€à¤‚ सदी रहा है पर पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¨ और नवीनतम की कड़ी के रूप में उनके विचारकों का आवशà¥à¤¯à¤• माना गया। महरà¥à¤·à¤¿ रमण à¤à¥€ बीसवीं सदी के पूरà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥à¤§ के ही हैं। पर उनके विचार उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¦à¥à¤§ में ही पà¥à¤°à¤šà¤°à¤¿à¤¤ और पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ हà¥à¤à¥¤ उनका चयन विशेष रूप से इसलिठहà¥à¤† कि उनकी पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ दरà¥à¤¶à¤¨ से अलग खड़ा कर देती है। कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿, à¤à¤®à¥¦à¤à¤¨à¥¦ राय, जवाहरलाल नेहरू, जयपà¥à¤°à¤•ाश नारायण तथा देवीपà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ चटà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ तो उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¦à¥à¤§ के ही हैं।
इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• से न केवल दरà¥à¤¶à¤¨ के छातà¥à¤° अपितॠदारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• विचारों में रूचि रखने वाले सामानà¥à¤¯ पाठक à¤à¥€ लाà¤à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¿à¤¤ होंगे और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उन विचारकों के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ में अधिक जानने की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मिलेगी।
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